बुधवार, 16 दिसंबर 2009

ख़ाक न हो खाकी की इज्ज़त पियो न खादी की हाला .




ख़ाक न हो खाकी की इज्ज़त
पियो न खादी की हाला .

मित्र न समझो पद,कुर्सी को..
मनमोहक साकी-बाला..

देश-भक्ति जब बने सुरा ,औ '
देश बने जब मदिरालय ..

खाकी ,खादी को तब मधु से ..
तृप्त करेगी मधुशाला

----अरविंद पाण्डेय

9 टिप्‍पणियां:

  1. देश हित की बात करो, छेड़ो अपने मन का तार,
    अपने कर्म से विमुख ना हो, तुम पर है यह गुरुत्तर भार ।
    विश्व में फिर छा जाएँ हम, प्रकट करे विश्व आभार,
    यह संभव हो सकता है, जब दूर करें हम भ्रष्टाचार ।।

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  2. देशभक्ति की अलख दिल में जलती रहनी चाहीए.
    बहुत अच्छी कविता है.

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  3. अराविंद जी,नेहा ,संगीत,गीत...???? : ) yaad kareeye..

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  4. कर्म सर्वोपरि है ,
    जय हिन्द.........

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  5. Respected Uncle jee,
    pranam, Wish You a Very happy New Year 2010.i wanted to contact you many times on your cell but you did not took response or may be you had neglected me but do n't worry,i respect you and i will always respect you like a guardian............. .
    Dear Uncle,if you want a openion on patna becomes patliputra then you are absolutely right because this patliputra was the center of gyan and Buddhism and if i am not wrong then this patliputra is a capital of Chandragupta's time and a great schooler or master mind chyanakya lived in this capital.so i want to say you that your opinion is correct,correct and absolutely correct.

    Thanking You
    & with best regards:
    Ashutosh

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  6. respected sir,pranam
    i just heard ur song "tum jo humare meet na hote" it's truly nice and fantastic.
    it's my request u to that plz sing more song of mukesh.
    thanking you,
    anish

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