रविवार, 23 नवंबर 2008

व्यर्थ के आकर्षणों से मुक्त जो राही ..



योजना ही मार्ग निष्कंटक बनाती है . 
लक्ष्य - केन्द्रित दृष्टि ही मंजिल दिलाती है ॥

व्यर्थ के आकर्षणों से मुक्त जो राही ..
विजय का आनंद पाता है सदा वह ही

---अरविंद पाण्डेय

6 टिप्‍पणियां:

  1. Positive attitude is most important for everyone. Any work should be done with a goal and positve approach, Sanjiv Kumar (KSDS Software)

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  2. योजना ही मार्ग निष्कंटक बनाती है .

    लक्ष्य - केन्द्रित दृष्टि ही मंजिल दिलाती है ॥

    व्यर्थ के आकर्षणों से मुक्त जो राही ..

    विजय का आनंद पाता है सदा वह ही
    bhai,pandey jee ,
    namaskar
    yojna aur lakshya kendrit drashti hee manjil ka raasta hotee hai .aapke vichar sarahneey aur anukarneey hain .
    ek nai disha miltee hai .
    uttam vicharon ke liye sadhvad.

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  3. योजना क्या मार्ग तक, मैं जानता कुछ भी नहीं.
    किन्तु मंजिल साफ़ मेरी, आँख से ओझल नही.
    हाँ अभी यात्रा का मेरी, अर्थ चाहे कुछ ना हो.
    किन्तु चलता जा रहा, मंजिल तलक रुकना नही.

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  4. hello sir ,ur poem is really inspirational n led me to yhink n introspect my attitude 2ward my action ,thnxs n keep on sending ,gudn8 n tk cr

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  5. आपकी रचना से प्रेरणा लेते हुए मैंने ये सोचा है कि-
    कुछ तय हुआ है,और कुछ बाकी है सफर
    मंज़िल से अपनी दूरी मिटाना ज़रूर है।

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