गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

कृष्ण हाथ उसके बिकते,संसार गया जो हार .



कामशून्य ही पा सकता है परमात्मा का प्यार.
कृष्ण हाथ उसके बिकते संसार गया जो हार 
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समः शत्रौ च मित्रे च ,तथा मानापमानयो:
शीतोष्णसुखदु:खेषु, समः संगविवर्जितः 

गीता के द्वादश अध्याय मे श्री भगवान ने उन गुणों का व्याख्यान किया है जिन गुणों के कारण वे स्वयं किसी मनुष्य से प्रेम करने लगते हैं..हम सभी श्री भगवान से प्रेम करने की चेष्टा करते हैं किन्तु इस बात पर बहुत कम लोगो का ध्यान जाता है कि वे कौन से गुण हैं जिनके कारण श्री भगवान् किसी से प्रेम करते हैं.

इस श्लोक मे श्री भगवान कहते कि जो व्यक्ति शत्रु और मित्र - दोनों मे समान दृष्टि रखता है ..जो मान और अपमान - दोनों स्थितियों मे समान रहता है अर्थात चित्त के स्तर पर अविचल रहता है .. सुख और दुःख तथा प्रतिकूल और अनुकूल - दोनों परिस्थितियों मे मन की तटस्थता बनाए रखते हुए भौतिक अर्थात विनाशवान पदार्थों के प्रति राग-मुक्त रहता है वह उन्हें प्रिय है.. 

इस अध्याय मे श्री भगवान द्वारा वर्णित गुणों से संपन्न व्यक्ति का एक विशिष्ट नामकरण श्री भगवान ने स्वयं द्वितीय अध्याय मे किया है .. वह नाम है - स्थितप्रग्य.. जिसका मूल लक्षण है काम शून्यता की स्थिति ..

----अरविंद पाण्डेय

9 टिप्‍पणियां:

  1. जी ये सत्य है...स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि, श्रीमद भगवदगीता जो हमें मूलतः स्तिथप्रज्ञ क़ी शिक्षा देती है बो आत्मा है इस शाश्त्र क़ी और ज्ञान क़ी ...मै भी ऐसा ही मानता हूँ...आभार ...

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  2. परम आदरणीय सर , आपकी लिखी हुई """"इस श्लोक मे श्री भगवान कहते कि जो व्यक्ति शत्रु और मित्र - दोनों मे समान दृष्टि रखता है ..जो मान और अपमान - दोनों स्थितियों मे समान रहता है अर्थात चित्त के स्तर पर अविचल रहता है .. सुख और दुःख तथा प्रतिकूल और अनुकूल - दोनों परिस्थितियों मे मन की तटस्थता बनाए रखते हुए भौतिक अर्थात विनाशवान पदार्थों के प्रति राग-मुक्त रहता है वह उन्हें प्रिय है.."""""
    मैं उपरोक्त लिखी बातो प़र कोई भी प्रशनचिन्ह नहीं लगा रहा हूँ , सिर्फ अपने बाड़े में जानना चाह रहा हूँ , क़ि कौन सी कमी आखिर हममें हैं क़ि हमेशा विपरीत प़रस्थितियों का सामना करना परता है .....
    जय हिंद !!!!!

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  3. युग बीते मगर गीता के ज्ञान के मायने कभी नहीं ...
    स्थितप्रज्ञ की इससे सटीक व्याख्या और क्या दी जा सकती है ...
    गीता सार से चुने इन मोतियों के लिए आपका बहुत आभार ...!!

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  4. आपकी बात बिलकुल सही...
    आपका आभार..

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  5. अमृत बचन यह है की ,- अगर इन्सान गीता का एक हीं श्लोक धारण कर ले ,उससे भी उसका कल्याण हो जायेगा ........

    .प्रणाम

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  6. अमृत बचन यह है की ,- अगर इन्सान गीता का एक हीं श्लोक धारण कर ले ,उससे भी उसका कल्याण हो जायेगा ........

    .प्रणाम

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  7. Extremely impressed with your rendition of the song "Tum jo hamare meet na hote". This has provided me another view of the personality of you whom I followed while growing up in Ranchi and you were the SP. Happened to meet you once but you would not recall.
    As a proud Bihari (though Ranchi is in Jharkhand now) it pains to see the state of our state and am sure that individuals like you could help a long way in taking Bihar to its pristine glory. In the meantime, I would be more than proud and glad to provide any help for my home state (both Bihar and Jharkhand) with which I still have close connection even though I am in USA now.

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  8. Extremely impressed with your rendition of the song "Tum jo hamare meet na hote". This has provided me another view of the personality of you whom I followed while growing up in Ranchi and you were the SP. Happened to meet you once but you would not recall.
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