गुरुवार, 10 जनवरी 2013

यही वक़्त है लटका दो अफ़ज़ल गुरु भी, देश मेरे !




यही वक़्त है लटका दो अफ़ज़ल गुरु भी, देश मेरे !
आज रात ही उन्हें बता दो अपनी ताक़त, देश मेरे !
उन सब को दो, देश निकाला,जो उनके हमदर्द यहाँ,
सरकश के दर सर झुकता है जिनका,उनको,देश मेरे!


आज गांधी यही कह रहे हैं सुभाष के साथ , सुनो-
बनो नहीं अब और अहिंसक तुम, सीमा पर,देश मेरे !


अरविंद पाण्डेय 

7 टिप्‍पणियां:

  1. bilkul sahi sir...desh ke dushmano ko kathor sandesh dekar hi hum desh ko ander or bahr se surakshit rakh skte hain...aam manas ka gussa jayaz hai kyunki wayavastha dhili par gai hai...jarurat hai isko sucharu or twarit gati dene ka...apki kavita ka bhav kafi gahra or samyik hai...:)

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज शनिवार (12-1-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  3. ha sir mai apka is bat sa bilkul sahmat hu ,samay a gaya hai un upardawiyo ko ya dikha dana ka ki hum kitna akjut hai . ak afjal hisa koi bhi hamari akta akhandta ka sath khalwar karna ka kosis kara ga uska bhi wahi harsh hoga jo afjal ka sath hua hai.hai hind sir.

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