रविवार, 12 अगस्त 2012

रामदेव जी और अन्ना जी के लिए पांच सूत्र !


रामदेव जी और अन्ना जी के लिए पांच सूत्र 
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समस्या भ्रष्टाचार-मुक्त भारत के निर्माण की है: कुछ सूत्र हैं जो उन्हें आंदोलन के रूप में शुरू करना चाहिए जो भ्रष्टाचार-मुक्त भारत के निर्माण के पक्षधर हैं..

१.सभी नागरिक संकल्प लें कि वे हानि उठायेगे किन्तु अपना काम साधने के लिए रिश्वत नहीं देगे..

२.विद्यालयों में विशेषरूप से दून स्कूल और अन्य तथाकथित अच्छे विद्यालयों में '' रिश्वत न लेने के फायदे '' विषय पर पाठ्यक्रम शुरू किया जाय.

३.स्कूलों में डोनेशन देकर प्रवेश देने के कार्य को रिश्वत का अपराध घोषित करने के लिए क़ानून बनाया जाय.

४.स्कूलों में उपहार लेने और देने की सीमा भी निर्धारित की जाय जिससे उपहार आदि के आधार पर स्टेटस का मूल्यांकन होना बंद हो.

५.एक १० करोड या ऊपर के साबित भ्रष्टाचार के लिए मृत्यु दंड का प्रावधान हो..जिससे २००० रुपये की रिश्वत और २०० करोड की रिश्वत में फर्क हो सके...
                  आप सहमत हैं ..यदि हाँ तो अभी --- राजनीति के मोह से बचकर ये सब कीजिये ..
                     वरना जीतने के लिए '' व्यावहारिक '' Practical होना पडेगा फिर क्या होगा उन सपनों का जिन्हें बाँटते हुए यहाँ तक की मंजिल तय की है.

-- अरविंद पाण्डेय 

5 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. u have nicely spelt out ur views & if we people take this vow than there is no room for doubt to achieve the goal.

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  2. आदरणीय श्रीमान महानुभाव प्रणाम : भ्रष्टाचार का बोलबाला यह दर्शाता है :
    राजनैतिक पार्टी के सहारे कैसे हम अपने सपनो के भारत को एक नई दिशा दे पाएंगे. भ्रष्टाचार पिछड़ेपन का घोतक है। भ्रष्टाचार का बोलबाला यह दर्शाता है कि जिसे जो करना है वह कुछ दे-दिवाकर अपना काम चला लेता है, और लोगों को कानों-कान खबर नहीं होती। होती भी है तो हर व्यक्ति खरीदे जाने के लिए तैयार है। गवाहों का उलट जाना, जांचों का अनंतकाल तक चलते रहना, सत्य को सामने न आने देना, ये सब एक पिछडे समाज के अति दुखदायी पहलू हैं। किसी को निर्णय लेने का अधिकार मिलता है तो वह एक या दूसरे पक्ष में निर्णय ले सकता है। यह उसका विवेकाधिकार है और एक सफल लोकतंत्र का लक्षण भी है। परंतु जब यह विवेकाधिकार वस्तुपरक न होकर दूसरे कारणों के आधार पर इस्तेमाल किया जाता है तब यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में आ जाता है अथवा इसे करने वाला व्यक्ति भ्रष्ट कहलाता है। किसी निर्णय को जब कोई शासकीय अधिकारी धन पर अथवा अन्य किसी लालच के कारण करता है तो वह भ्रष्टाचार कहलाता है। भ्रष्टाचार के संबंध में हाल ही के वर्षों में जागरूकता बहुत बढ़ी है। अंग्रेजों ने भारत के राजा महराजाओं को भ्रष्ट करके भारत को गुलाम बनाया। उसके बाद उन्होने योजनाबद्ध तरीके से भारत में भ्रष्टाचार को बढावा दिया और भ्रष्टाचार को गुलाम बनाये रखने के प्रभावी हथियार की तरह इस्तेमाल किया। देश में भ्रष्टाचार भले ही वर्तमान में सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है, लेकिन भ्रष्टाचार ब्रिटिश शासनकाल में ही होने लगा था जो हमारे राजनेताओं को विरासत में दे गए थे।भारत में भ्रष्टाचार रोकने के लिए बहुत से कदम उठाने की सलाह दी जाती है। उनमें से कुछ प्रमुख हैं-सभी कर्मचारियों को वेतन आदि नकद न दिया जाय बल्कि यह पैसा उनके बैंक खाते में डाल दिया जाय.कोई अपने बैंक खाते से एक बार में दस हजार तथा एक माह में पचास हजार से अधिक न निकाल पाए. अधिकाधिक लेना-देन इलेक्ट्रोनिक रूप में की जाय.बड़े नोटों (१०००, ५०० आदि) का प्रचालन बंद किया जाय.जनता के प्रमुख कार्यों को पूरा करने एवं शिकायतों पर कार्यवाही करने के लिए समय सीमा निर्धारित हो. लोकसेवकों द्वारा इसे पूरा न करने पर वे दंड के भागी बने.विशेषाधिकार और विवेकाधिकार कम किये जाँय या हटा दिए जांय.सभी 'लोकसेवक' (मंत्री, सांसद, विधायक, ब्यूरोक्रेट, अधिकारी, कर्मचारी) अपनी संपत्ति की हर वर्ष घोषणा करें.भ्रष्टाचार करने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया जाय. भ्रष्टाचार की कमाई को राजसात (सरकार द्वारा जब्त) करने का प्रावधान हो.चुनाव सुधार किये जांय और भ्रष्ट तथा अपराधी तत्वों को चुनाव लड़ने पर पाबंदी हो.विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों का काला धन भारत लाया जाय और उससे सार्वजनिक हित के कार्य किये जांय.
    भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष और आन्दोलन
    जयप्रकाश नारायण द्वारा सन १९७४ में सम्पूर्ण क्रान्ति
    विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा सन १९८९ में आन्दोलन (बोफोर्स काण्ड के विरुद्ध)
    स्वामी रामदेव द्वारा विदेशों में जमा काला धन वापस लाने हेतु आन्दोलन
    अण्णा हजारे द्वारा जनलोकपाल विधेयक पारित कराये जाने हेतु आन्दोलन
    अत: भ्रटाचार और असमानता की समस्याओं को रोकने में हम असफल हैं। यही हमारी महाशक्ति बनने में रोड़ा है। संस्कारवान् भारत बनाने का संकल्प लें… सुन्दर भारत के लिए हम आपके साथ हैं. ..... दीपेन्द्र


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  3. आदरणीय श्रीमान महानुभाव प्रणाम : भ्रष्टाचार का बोलबाला यह दर्शाता है :
    राजनैतिक पार्टी के सहारे कैसे हम अपने सपनो के भारत को एक नई दिशा दे पाएंगे. भ्रष्टाचार पिछड़ेपन का घोतक है। भ्रष्टाचार का बोलबाला यह दर्शाता है कि जिसे जो करना है वह कुछ दे-दिवाकर अपना काम चला लेता है, और लोगों को कानों-कान खबर नहीं होती। होती भी है तो हर व्यक्ति खरीदे जाने के लिए तैयार है। गवाहों का उलट जाना, जांचों का अनंतकाल तक चलते रहना, सत्य को सामने न आने देना, ये सब एक पिछडे समाज के अति दुखदायी पहलू हैं। किसी को निर्णय लेने का अधिकार मिलता है तो वह एक या दूसरे पक्ष में निर्णय ले सकता है। यह उसका विवेकाधिकार है और एक सफल लोकतंत्र का लक्षण भी है। परंतु जब यह विवेकाधिकार वस्तुपरक न होकर दूसरे कारणों के आधार पर इस्तेमाल किया जाता है तब यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में आ जाता है अथवा इसे करने वाला व्यक्ति भ्रष्ट कहलाता है। किसी निर्णय को जब कोई शासकीय अधिकारी धन पर अथवा अन्य किसी लालच के कारण करता है तो वह भ्रष्टाचार कहलाता है। भ्रष्टाचार के संबंध में हाल ही के वर्षों में जागरूकता बहुत बढ़ी है। अंग्रेजों ने भारत के राजा महराजाओं को भ्रष्ट करके भारत को गुलाम बनाया। उसके बाद उन्होने योजनाबद्ध तरीके से भारत में भ्रष्टाचार को बढावा दिया और भ्रष्टाचार को गुलाम बनाये रखने के प्रभावी हथियार की तरह इस्तेमाल किया। देश में भ्रष्टाचार भले ही वर्तमान में सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है, लेकिन भ्रष्टाचार ब्रिटिश शासनकाल में ही होने लगा था जो हमारे राजनेताओं को विरासत में दे गए थे।
    भारत में भ्रष्टाचार रोकने के लिए बहुत से कदम उठाने की सलाह दी जाती है। उनमें से कुछ प्रमुख हैं-
    सभी कर्मचारियों को वेतन आदि नकद न दिया जाय बल्कि यह पैसा उनके बैंक खाते में डाल दिया जाय.
    कोई अपने बैंक खाते से एक बार में दस हजार तथा एक माह में पचास हजार से अधिक न निकाल पाए. अधिकाधिक लेना-देन इलेक्ट्रोनिक रूप में की जाय.बड़े नोटों (१०००, ५०० आदि) का प्रचालन बंद किया जाय.जनता के प्रमुख कार्यों को पूरा करने एवं शिकायतों पर कार्यवाही करने के लिए समय सीमा निर्धारित हो. लोकसेवकों द्वारा इसे पूरा न करने पर वे दंड के भागी बने.विशेषाधिकार और विवेकाधिकार कम किये जाँय या हटा दिए जांय.सभी 'लोकसेवक' (मंत्री, सांसद, विधायक, ब्यूरोक्रेट, अधिकारी, कर्मचारी) अपनी संपत्ति की हर वर्ष घोषणा करें.
    भ्रष्टाचार करने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया जाय. भ्रष्टाचार की कमाई को राजसात (सरकार द्वारा जब्त) करने का प्रावधान हो.
    चुनाव सुधार किये जांय और भ्रष्ट तथा अपराधी तत्वों को चुनाव लड़ने पर पाबंदी हो.विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों का काला धन भारत लाया जाय और उससे सार्वजनिक हित के कार्य किये जांय.
    भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष और आन्दोलन
    जयप्रकाश नारायण द्वारा सन १९७४ में सम्पूर्ण क्रान्ति
    विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा सन १९८९ में आन्दोलन (बोफोर्स काण्ड के विरुद्ध)
    स्वामी रामदेव द्वारा विदेशों में जमा काला धन वापस लाने हेतु आन्दोलन
    अण्णा हजारे द्वारा जनलोकपाल विधेयक पारित कराये जाने हेतु आन्दोलन
    अत: भ्रटाचार और असमानता की समस्याओं को रोकने में हम असफल हैं। यही हमारी महाशक्ति बनने में रोड़ा है। संस्कारवान् भारत बनाने का संकल्प लें… सुन्दर भारत के लिए हम आपके साथ हैं. ..... दीपेन्द्र


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  4. bahut hi sunder or vayawaharik sujhao hai.agar ye baatien lagoon ho jae 2 sach me isthitiyan kafi badal jaengi.
    apne ek behtarin or saral marag sujhaya hai bharastrachar ke khilaf jung ke liye sir,agar hum ispe amal laaien 2 desh or samaj ki paristhiti bilkul alag ho jaegi...
    jab tak aam janmanas samanta ka bhav mehsoos nahi karega tab tak isthitiyon ko badalna kafi muskil hai...
    jab tak kuch thosh kadam in bharatachariyon ke khilaaf nahi liya jaega tab tak aam logon me wiswas ka bhav nahi aaega...
    apke vichar behtarin or kafi prernadayak hain...

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