शनिवार, 13 अगस्त 2011

एक हुए भाई बहन , धन्य धन्य यह प्रीत.

 
रक्षाबंधन विजयते

स्वारथ के संसार में , देखी अद्भुत रीत.
एक हुए भाई बहन , धन्य धन्य यह प्रीत.

कृष्ण सुभद्रा राम का, आज करूं अभिषेक .
ब्रज की प्रेमकथा सुनी, हुए पिघल कर एक.


3 टिप्‍पणियां:

  1. यह रिश्ता अनमोल , भावनाएं भी बेमिसाल !

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  2. अनुपम उदाहरण, स्नेहिल प्रेम का।

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  3. धन्य धन्य यह आपकी भाई बहन की प्रीत भरी कविता .....

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