शनिवार, 12 मई 2012

जो कुछ भी है तू, बस, तेरी माँ का ही है असर.


हो देवता या हो कोई जन्नत का फ़रिश्ता.
पैदा न कर सकेगा खून-ओ-दूध का रिश्ता .
माँ ! तूने अपने खून से ही दूध बनाकर.
पाला है प्यार से खुद अपना दूध पिलाकर.

तू है कहीं जन्नत में यहाँ मै ज़मीन पर.
फिर भी तू मेरे पास है जैसे मेरे ही घर.


बांहों में यूँ लिपटाके मुझे रात को सोना.
बेशर्त मुहब्बत में हरिक पल ही भिगोना.
हर चीज़ ही पाने को मेरा जिद में वो रोना.
सब कुछ मुझे देने को तेरे चैन का खोना.

हर साँस मेरे दिल को देके जाती है खबर.
जो कुछ भी है तू, बस, तेरी माँ का ही है असर.


-- अरविंद पाण्डेय 

9 टिप्‍पणियां:

  1. भावपूर्ण पंक्तियाँ ... नमन हर माँ को ...
    आभार...
    आइन्स्टीन ....

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  2. माँ की बाहों में छिपा आनन्द अनुपम।

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  3. कौन माँ गदगद ना होगी इस सम्मान को पाकर ...
    माँ के साथ ऐसे पुत्र को भी नमन

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  4. माँ के प्रेम की बहुत ही सुंदर कविता हैं ... माँ तो माँ ही हैं ...

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  5. सुंदर भावपूर्ण रचना |माँ दिवस पर शुभ कामनाएं |
    आशा

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  6. हर साँस मेरे दिल को देके जाती है खबर.
    जो कुछ भी है तू, बस, तेरी माँ का ही है असर.
    ओत-प्रोत है भावनाओं से प्रत्येक शब्द ...!
    जब इतनी प्रगाढ़ आस्था हो ,भाव उज्जवल हो ही जायेंगे ...!
    शुभकामनायें ...!!

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