शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

इसी के नूर में श्री कृष्ण ने गीता थी कही..



मिटेगी सल्तनत, फटेगा आसमां इक दिन .
ये  शम्स ,चाँद सितारे बुझे बुझे होंगें. 
अगर बचेगा तो ईमान , आखिरत के दिन.
अगर  बचा सके उसे, तो, बच सकोगे तुम.

इसी के नूर में  श्री कृष्ण ने गीता थी कही.
इसी की रोशनी में आयतें उतरीं थीं कभी.
कुरआन , बाइबिल भी बस इसी से रोशन है.
इसी दरिया से कभी वेद  की ऋचा थी बही 


- अरविंद पाण्डेय

7 टिप्‍पणियां:

  1. परम आदरणीय सर, आपके इन्ही सब सुंदर कविताओ से मुझे तो बहुत ही शान्ति मिलती हैं ....जय हिंद !!!

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  2. वही बचेगा तो धर्म भी बचा रहेगा।

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  3. अगर बचा सको ईमान तो बच सकोगे तुम ...
    यही है हर धर्म का मूल ...सही !

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  4. It's an awesome composition based on factual events that we often come across around us in our daily life. Lord Krishna had already cautioned us to this effect in ancient days while briefing the great Warrior Arjuna of that time in the battle field of Krukshetra that is located in Haryana State of India where Kaurav and Pandav had fought war amongst themselves for ancestral properties. Let us strive hard to be good and do well to others that is all expected from us during this space age!

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  5. अगर बचेगा तो ईमान ....सच कहा ...।

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  6. कुरआन , बाइबिल भी बस इसी से रोशन है.
    इसी दरिया से कभी वेद की ऋचा थी बही

    वास्तविकता को शब्द दे दिए आपने आपका आभार

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