बुधवार, 14 जुलाई 2010

कीट्स हों दिल में तो फिर इस ज़िंदगी में क्या कमी.

जॉन कीट्स 
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हों अगर ग़ालिब जेहन में , हों जुबां पर कालिदास  .
कीट्स हों दिल में तो फिर इस ज़िंदगी में क्या कमी.
----अरविंद पाण्डेय

8 टिप्‍पणियां:

  1. परम आदरणीय सर , जॉन कीट्स , ग़ालिब , कालिदास जी का अदभुत मिश्रण आपने किया हैं ...अति सुंदर सर ....जय हिंद !!!!!!

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  2. तो इस जिंदगी में क्या कमी है ....यही सही है..!
    भाई , आपका ब्लॉग एक कम्पलीट पैकेज है ...कितना कुछ है एक साथ यहाँ ...आभार ...!

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  3. अरविंद जी,
    क्या बात कही है....
    अगर हम इस दुनिया में ऐसे महान व्यक्तियों को साथी बना लें तो किसी और चीजं की जरूरत ही नहीं होगी।

    आप कम शब्दों में बड़ी बात कहना जानते हैं, क्यों न आप हिन्दी हाइकू ब्लॉग को पढ़ कर अपने विचार हमें बताएँ।
    लिंक है...
    http://hindihaiku.wordpress.com


    हरदीप

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