रविवार, 20 दिसंबर 2009

रामायण ,गीता का नियमित पारायण




एक शोध के अनुसार, कविता का नियमित अध्ययन और  संभव  हो  तो काव्य - रचना  , मस्तिष्क की स्मृति संबंधी कोशिकाओं को सशक्त करता है.. और ऐसा करने से वृद्धावस्था तक स्मृति शक्ति तीव्र बनी रहती है ..इसीलिये भारतीय संस्कृति में रामायण , गीता आदि के नियमित पारायण की व्यवस्था की गई है.. ..यह पारायण, अर्थ ज्ञान के साथ करने का विधान है ..सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रसूलल्लाह ने भी फरमाया है कि चाहे एक ही आयत पढ़ने में रातभर का वक्त लग जाय पर मतलब समझते हुए कुरआन शरीफ की तिलावत करनी चाहिए ..

----अरविंद पाण्डेय

6 टिप्‍पणियां:

  1. नवीन भोजपुरिया20 दिसंबर 2009 को 12:55 pm

    जी बहुत सही कहा आपने ।
    मै सहमत हु इस बात से ।

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  2. Thank you to please kindly give us a summary in English. We are eager to understand your message. Krsna-kirtana dasi

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  3. "बंधन टूटे ना" मूवी में आपका अभिनय देखा. भोजपुरी सुपर स्टार मनोज तिवारी और एक स्थापित खलनायक अभिनेता शक्ति कपूर के सामानांतर आपका प्रदर्शन और संवाद प्रेषण देख कोई भी नहीं कह सकता कि आपमें अभिनय का अनुभव नहीं है. ऐसा लगता है कि आप मंजे हुए कलाकार हैं. बनावटीपन नहीं झलकता है. सबसे खास बात है, आपने दो बड़े नायको के समक्ष अभिनय किया और उनकी तुलना में कही भी फीके नहीं लगे.
    आश्चर्य है कि आप इतने व्यस्ततम पद पर रहते हुए भी लिखने के साथ ही साथ इतना सब कुछ कैसे कर लेते हैं!

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  4. सच में कविता मस्तिष्क का सच्चा भोजन है |
    बहुत बहुत बधाई
    आशा

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